एडवेंचर टूरिज़्म में सुरक्षा मानकों को मज़बूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड (UTDB) ने HANIFL सेंटर के साथ मिलकर राज्य के रिवर राफ्टिंग गाइड्स के लिए फर्स्ट एड, सीपीआर और स्किल डेवलपमेंट प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की है।
इस पहल के तहत 700 से अधिक रिवर गाइड्स को 10 जनवरी से फरवरी 2026 तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह कोर्स HANIFL के माध्यम से वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य होगा। उत्तराखंड में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर और इतने उच्च स्तर का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है।

यह प्रशिक्षण सर्दियों के लीन पीरियड में आयोजित किया जा रहा है, जब राफ्टिंग गतिविधियां अपेक्षाकृत कम होती हैं। इससे गाइड्स अपने काम को प्रभावित किए बिना पूरे मन से प्रशिक्षण में भाग ले सकेंगे। प्रशिक्षण के दौरान फर्स्ट एड, सीपीआर और बेसिक लाइफ सपोर्ट से जुड़े विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में होगा और अंत में परीक्षा व प्रमाणन भी किया जाएगा।
इस कार्यक्रम की एक खास बात इसकी साझा लागत संरचना है। प्रति गाइड प्रशिक्षण का खर्च जिसमें से 50 प्रतिशत राशि UTDB, 25 प्रतिशत गंगा नदी राफ्टिंग एसोसिएशन (GNR) और 25 प्रतिशत स्वयं रिवर गाइड्स द्वारा वहन की जाएगी। इससे सरकार, उद्योग और गाइड्स—तीनों की भागीदारी सुनिश्चित होती है।

यह पहल उत्तराखंड सरकार के पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल, आईएएस, की दूरदर्शी सोच का परिणाम है। अधिकारियों के अनुसार, राज्य के इतिहास में यह पहली बार है जब सरकार ने एडवेंचर टूरिज़्म से जुड़े पेशेवरों के लिए इतने बड़े स्तर पर और अंतरराष्ट्रीय मानकों वाला प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है।
ऋषिकेश, जिसे देश की रिवर राफ्टिंग राजधानी माना जाता है, हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है। उत्तराखंड में राफ्टिंग उद्योग 200 से 250 करोड़ रुपये के बाजार का रूप ले चुका है और इससे हजारों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोज़गार मिलता है।
इस फैसले का राफ्टिंग ऑपरेटर्स और संगठनों ने स्वागत किया है। गंगा नदी राफ्टिंग एसोसिएशन (GNRA) के गिब्रियल की विशेष सराहना की जा रही है, जिन्होंने लंबे समय से रिवर गाइड्स के लिए मेडिकल प्रशिक्षण की आवश्यकता को उठाया और इस पहल को ज़मीन पर लाने में सक्रिय भूमिका निभाई।
पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह कार्यक्रम केवल एक बार तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले वर्षों में इस तरह के अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि राज्य में पर्यटन की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लगातार बेहतर बनाया जा सके। आगे चलकर यह प्रशिक्षण ट्रेकिंग, पर्वतारोहण, पैराग्लाइडिंग और अन्य एडवेंचर गतिविधियों से जुड़े गाइड्स तक भी बढ़ाया जाएगा।
इस पहल के साथ उत्तराखंड न केवल एक रोमांचक पर्यटन स्थल, बल्कि सुरक्षित, जिम्मेदार और विश्वस्तरीय एडवेंचर टूरिज़्म के रूप में अपनी पहचान को और मज़बूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।











