पीएम की माता के बाद कांग्रेस द्वारा सीएम धामी के पितृ श्राद्ध तर्पण का उपहास, नैतिक पतन की पराकाष्ठा !
मुहम्मद दीपक को हीरो बताने वाले राहुल के कांग्रेसी, पीड़ित हिंदू परिवार से मिलने क्यों नहीं जाते? : भाजपा*
भारतीय शौर्य का प्रतीक बने पायलट के सम्मान में राहुल की जुबान सिली क्यों है? : नरेश बंसल
भाजपा ने कांग्रेस पर विरोध की राजनैति करते करते सनातनी परम्पराओं और दिवंगत आत्माओं के अपमान की घटिया राजनीति करने का आरोप लगाया है।
राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने कहा, पीएम मोदी के मातृ शक्ति सम्मान की तरह कांग्रेस द्वारा सीएम धामी के पितृ श्राद्ध तर्पण पर उपहास करना, नैतिक पतन की पराकाष्ठा है।
साथ ही आईना दिखाया कि एक हिंदू व्यापारी को धमकाने वाले कोटद्वार के मुहम्मद दीपक को हीरो बताने वाले राहुल कांग्रेसी पीड़ित परिवार से मिलने नहीं जाते। वहीं दुनिया में भारतीय शौर्य का प्रतीक बने पायलट के सम्मान में राहुल की जुबान सिली हुई है।
पार्टी मुख्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए बंसल ने आरोप लगाया कि विपक्ष विशेषकर कांग्रेस की कथनी और करनी में बहुत अंतर है, इसे सभी जानते हैं। लेकिन विरोध की राजनीति करते-करते कांग्रेसआस्थाओं, सनातन परंपराओं के बाद दिवंगत आत्माओं के अपमान का भी काम करने लगी है।

कांग्रेस की राजनीति अब विरोध तक सीमित नहीं है। बल्कि दिवंगत परिजनों, सनातन आस्थाओं को निशाना बनाने तक पहुँच गई है। कांग्रेस के नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माता के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया, सेना के प्रमुख रहे जनरल बिपिन रावत को ‘सड़क का गुंडा’ कहा।
वहीं आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा, जो कहते हैं “हम मोहब्बत की दुकान चलाते हैं”, वह किस प्रकार की नफरत फैलाते हैं यह इसका प्रमाण है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अपने दिवंगत पिताजी के तर्पण, श्राद्ध पर की गई कांग्रेस द्वारा ओछी टिप्पणी। दुर्भाग्यपूर्ण सच यह है कि कांग्रेस कभी भी आस्था, सनातन का अपमान करने से चूकती नहीं है।
कहा, सभी जानते हैं कि श्राद्ध के पूरे 15 दिन श्रद्धा से सबै अपने दिवंगत आत्माओं के प्रति आस्था व्यक्त करते हैं। श्रद्धा से किया यह तर्पण दिवंगत आत्माओं को सुख-शांति मिले, और इसकी अपेक्षा से किया जाता हैं। लेकिन चूंकि कांग्रेस का सनातन परंपराओं से कोई लेना-देना नहीं है।
इसलिए वह श्राद्ध जैसी सनातन परंपरा में दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और तर्पण के पवित्र संस्कार को भी अपमानित करने का काम करते हैं। वे राजनैतिक और मोदी विरोध में सनातन आस्था के अपमान में भी सभी सीमाओं को लांघ देते हैं। अब तो हद हो गई है कि दिवंगत परिजनों और पवित्र धार्मिक संस्कारों को भी राजनीति का हथियार बनाने से नहीं चूक रहे हैं।
उन्होंने सिलसिलेवार ढंग से कांग्रेस की पोल खोलने के क्रम में कहा कि जिस प्रकार से हल्द्वानी में खड़गे जी की सभा को लेकर एक झूठा नैरेटिव फैलाने का काम किया गया, वह प्रतीक है ओछी राजनीति का।

कहा, कांग्रेस के शहजादे जगह-जगह झूठ की गूँज में बोलते हैं कि “हम मोहब्बत की दुकान चलाते हैं”। लेकिन उनकी और उनके नेताओं की करतूतों बताती है कि सम्मान नहीं, वे केवल नफरत का बाजार लगाते हैं।
जहाँ पर राजनीतिक विरोधियों के माता-पिता का मजाक होता है, उन पर टिप्पणी करना कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति का इन्होंने हिस्सा बन गया है। उन्होंने प्रश्न किया कि जो अपने विरोधियों के माता-पिता का सम्मान नहीं कर सकता, वह मोहब्बत और संवेदना की राजनीति का दावा किस मुँह से कर सकता है?
इसी तरह कोटद्वार में मुहम्मद दीपक के ताजा घटनाक्रम पर कांग्रेस को कठघरे में खड़े कर पूछा कि एक तरफ कांग्रेस सनातन परंपरा और श्राद्ध पर सवाल उठाती है। वहीं दूसरी तरफ मोहम्मद दीपक की गिरफ्तारी पर चुप्पी साधे बैठी है।
जबकि उसके खिलाफ गुंडागर्दी और हिंदू व्यापारी को धमकाने के आरोपों में कार्रवाई हुई है।
राहुल गांधी के मोहम्मद दीपक के साथ सार्वजनिक मेल-जोल के बाद कांग्रेस की यह चुप्पी सवाल खड़े करती है। क्या कांग्रेस के लिए अपने राजनीतिक करीबियों के लिए अलग मापदंड हैं?
राहुल गांधी जिस मोहम्मद दीपक से मिलकर उसके समर्थन का संदेश देते हैं, उसी व्यक्ति की अब व्यापारी से कथित मारपीट, गाली-गलौज और धमकी के मामले में जब गिरफ्तारी हुई। उन्होंने कांग्रेस से पूछा कि कांग्रेस जवाब दे, क्या राजनीतिक फायदे के लिए कानून-व्यवस्था से जुड़े गंभीर आरोपों वाले लोगों से नजदीकी रखना ही उसकी राजनीति है?
वहीं मोहम्मद दीपक से मिलने और उसके साथ सार्वजनिक नजदीकी दिखाने के लिए कांग्रेस के नेता कोटद्वार तक पहुँच सकते हैं। किंतु जिस हिंदू व्यक्ति, पीड़ित व्यक्ति, व्यापारी जिससे मारपीट हुई है, उसका हाल पूछने के लिए कोई कांग्रेस का नेता आज तक नहीं गया है। न उस पर कोई वक्तव्य किसी कांग्रेस नेता का सामने आया है। क्या पीड़ित से मिलकर उसका पक्ष जानना कांग्रेस की जिम्मेदारी नहीं है?
सवाल यह भी है कि क्या कांग्रेस की संवेदनशीलता व्यक्ति देखकर बदलती है? कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि पीड़ित व्यापारी के साथ खड़े होने के बजाय उसके राजनीतिक संपर्क में रहे व्यक्ति के प्रति इतनी सक्रियता क्यों दिखाई गई? सभी देख रहे हैं कि राहुल और कांग्रेस की नजरों में ऐसे लोग हीरो हैं और जो राष्ट्रवादी, सनातनी लोग हैं उनका कांग्रेस अपमान करती है।
बंसल ने कहा कि भाजपा की राजनीति सेवा, सुशासन, विकास और महिला सशक्तिकरण की राजनीति के मूल भाव पर आधारित है। राजनीतिक विरोध को व्यक्तिगत कटुता में बदलने के बजाय जनता के विकास, युवाओं को अवसर, मातृशक्ति के सशक्तिकरण और उत्तराखंड के हितों सर्वोपरि रखना भाजपा की प्राथमिकता है।
भाजपा मानना है कि राजनीतिक संघर्ष मुद्दों पर होना चाहिए, व्यक्तिगत हमलों पर नहीं, विचारों पर हो, आस्थाओं पर नहीं और लोकतांत्रिक बहस तथ्यों तथा मर्यादा के साथ हो। जी स्वस्थ लोकतांत्रिक राजनीति और उत्तराखंड की सामाजिक परंपरा के अनुरूप है।
इसी तरह उन्होंने कांग्रेस की एक घृणित मानसिकता का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार भारत के वीर कैप्टन स्मिथ मच्छार ने 174 लोगों की जान बचाई अपनी जान पर खेलकर, उनके लिए एक भी ट्वीट या एक भी शब्द ‘मोहब्बत की दुकान’ वालों के मुंह से नहीं निकला। जबकि संसद के अंदर फिलीस्तीन का बैग लटकाकर प्रियंका वाड्रा आती हैंl
गाजा में कुछ होता है तो सोनिया गांधी लेख लिखती हैं, बटाला हाउस का कांड होता है तो आँसू आ जाते हैं। और यह सब एक वर्ग-विशेष की तुष्टिकरण की राजनीति के लिए किया जाता है, जो देश के लोकतंत्र के लिए घातक है।
















