भारत निर्वाचन आयोग को भंग किये जाने एवं मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार सहित दोनों निर्वाचन आयुक्तों को तत्काल पद से हटाये जाने तथा उनके द्वारा पूर्व में लिए गये फैसलों को निरस्त किये जाने की मांग को लेकर आज प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व मे प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, सीडब्लूसी सदस्य करन माहरा, उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापडी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविन्द सिंह कुंजवाल, पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा, अनुशासन समिति अध्यक्ष विक्रम सिंह नेगी सहित पार्टी विधायकों एवं वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में विशाल प्रदर्शन के साथ सचिवालय स्थित निर्वाचन कार्यालय का घेराव किया गया तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया गया।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आह्रवान पर देशभर में आयोजित कार्यक्रमों के तहत प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से सचिवालय तक नारेबाजी करते हुए मार्च निकाला तथा सचिवालय स्थित निर्वाचन कार्यालय का घेराव किया।
महामहिम राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी सदर को सौंपते हुए प्रदेश कांग्रेस ने मांग की कि भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार एवं दोनों निर्वाचन आयुक्तों को तत्काल पद से हटाते हुए गिरफतार किया जाय तथा उनके द्वारा पूर्व में लिए गये फैसलों को निरस्त करने के साथ ही उनके स्थान पर नये मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की जाय।
कांग्रेस पार्टी ने कहा कि भारत का निर्वाचन आयोग देश के लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं संवैधानिक संस्थान है। स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव कराना निर्वाचन आयोग की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। देश के करोड़ों मतदाताओं का विश्वास निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता एवं संवैधानिक प्रतिबद्धता पर टिका हुआ है।
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी का स्पष्ट मत है कि हाल के दिनों में निर्वाचन प्रक्रिया, मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण तथा चुनावी पारदर्शिता से जुड़े अनेक गंभीर प्रश्न सामने आए हैं। विशेष रूप से मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने तथा आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों एवं आम मतदाताओं के बीच चिंता उत्पन्न हुई है।
एसआइआर प्रक्रिया में किये जा रहे भेदभाव पर विपक्षी दलों की शिकायतों का निर्वाचन आयोग द्वारा कोई संज्ञान नहीं लिया जा रहा है। ऐसी परिस्थितियों में निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता, जवाबदेही और सभी राजनीतिक दलों के प्रति समान व्यवहार अत्यंत आवश्यक है।
कंाग्रेस नेताओं ने कहा कि निर्वाचन आयोग के दो निर्वाचन आयुक्तों की असहमति के बावजूद मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा एक तरफा असंवैधानिक फैसले लिए जा रहे हैं जो कि लोकतांत्रिक व्यवस्था का पूरी तरह हनन है।
कांग्रेस पार्टी का मानना है कि निर्वाचन आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान की विश्वसनीयता तभी कायम रह सकती है, जब उसके निर्णयों एवं कार्यप्रणाली पर आम जनता तथा सभी राजनीतिक दलों का विश्वास बना रहे। यदि निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता एवं निर्णय प्रक्रिया को लेकर व्यापक स्तर पर सवाल उठते हैं तो उन सवालों का स्पष्ट एवं संतोषजनक उत्तर दिया जाना आवश्यक है।
कंाग्रेस ने कहा कि इसी प्रकार की धांधली उत्तराखंड राज्य में एसआइआर की प्रक्रिया में की गई। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी राज्य में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान सामने आ रही गंभीर अनियमितताओं एवं प्रक्रियागत विसंगतियों की ओर भी आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहती है।
प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में सुरक्षित रखना निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है। इसके विपरीत एसआइआर प्रक्रिया के दौरान जिस प्रकार बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नामों पर आपत्तियां दाखिल की जा रही हैं, उससे मतदाता सूची की पारदर्शिता एवं निष्पक्षता को लेकर गंभीर प्रश्न उत्पन्न हो रहे हैं। उत्तराखंड राज्य के अनेक विधानसभा क्षेत्रों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि कुछ व्यक्तियों द्वारा बड़ी संख्या में फार्म-7 दाखिल कर अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं के नाम हटाने का प्रयास किया गया।
यदि कोई व्यक्ति संबंधित मतदाताओं का वास्तविक पड़ोसी अथवा स्थानीय निवासी नहीं है, तो उसके द्वारा इतनी बड़ी संख्या में आपत्तियां दाखिल किये जाने की परिस्थितियों की जांच आवश्यक है।

उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने निम्नलिखित मांगें महामहिम के समक्ष प्रस्तुत करते हुए उनसे हस्तक्षेप की मांग की:-
1. भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से तत्काल इस्तीफा दें, ताकि निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता के प्रति जनता का विश्वास पुनः स्थापित हो सके।
2. निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण एवं संशोधन की प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
3. मतदाता सूची से नाम हटाने अथवा किसी मतदाता के विरुद्ध आपत्ति दर्ज करने की प्रक्रिया में निष्पक्ष जांच एवं उचित सुनवाई का अधिकार सुनिश्चित किया जाए।
4. राजनीतिक दलों द्वारा उठाई गई निर्वाचन संबंधी आपत्तियों एवं शिकायतों का समयबद्ध एवं निष्पक्ष निस्तारण किया जाए तथा संबंधित पक्षों को कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
5. निर्वाचन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के पक्षपात, दबाव अथवा मनमानी की शिकायतों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
6. मतदाता सूची एवं निर्वाचन प्रक्रिया से संबंधित सभी महत्वपूर्ण आंकड़े, आपत्तियां, उनके निस्तारण तथा नाम हटाने/जोड़ने की प्रक्रिया को यथासंभव सार्वजनिक एवं पारदर्शी बनाया जाए।
7. यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम राजनीतिक अथवा प्रशासनिक दबाव के कारण मतदाता सूची से न हटे और किसी भी अपात्र व्यक्ति का नाम नियमों के विरुद्ध शामिल न किया जाए।
8. निर्वाचन आयोग की संवैधानिक गरिमा, स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए आवश्यक संस्थागत सुधार एवं जवाबदेही की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
9. एसआइआर प्रक्रिया के दौरान प्राप्त सभी फार्म-7 आवेदनों का विधानसभा एवं बूथवार विवरण सार्वजनिक किया जाए तथा ऐसे व्यक्तियों की सूची सार्वजनिक की जाए जिन्होंने असामान्य संख्या में फार्म-7 दाखिल किये हैं तथा उनके द्वारा दाखिल आपत्तियों की विशेष जांच कराई जाए। साथ ही एक व्यक्ति द्वारा बड़ी संख्या में दाखिल फार्म-7 की स्थिति में यह सत्यापित किया जाए कि वह संबंधित मतदाताओं एवं क्षेत्र से वास्तविक रूप से जुड़ा हुआ है अथवा नहीं तथा किसी भी वैध मतदाता का नाम केवल फार्म-7 अथवा किसी
आपत्ति के आधार पर तब तक न हटाया जाए, जब तक बीएलओ/ईआरओ द्वारा वास्तविक भौतिक सत्यापन एवं संबंधित मतदाता को सुनवाई का पूर्ण अवसर न दिया जाए।
कंाग्रेसजनों ने कहा कि लोकतंत्र में मतदाता का मत सर्वोच्च है। मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की अनियमितता अथवा निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर उठने वाला प्रश्न सीधे लोकतंत्र की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है। देश में संवैधानिक संरक्षक होने के नाते उत्तराखंड प्रदेश कंाग्रेस कमेटी महामहिम राष्ट्रपति से आग्रह करती है कि भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार एवं दोनों निर्वाचन आयुक्तों को तत्काल पद से हटाते हुए गिरफतार किया जाय तथा उनके द्वारा पूर्व में लिए गये फैसलों को निरस्त करने के साथ ही उनके स्थान पर नये मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की जाय।
कंाग्रेस ने विश्वास व्यक्त किया कि महामहिम राष्ट्रपति संविधान की रक्षा के लिए कंग्रेस पार्टी की उपरोक्त मांगों का गंभीरतापूर्वक संज्ञान लेते हुए आवश्यक संवैधानिक एवं विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।















